आओ साधू साधू खेलें,
अपने साथ में मेरे काका
दुक्खी और कल्लू को भी लेंलें
आओ साधू साधू खेलें
मिलजुल कर हम पियेंगे
पेप्सी और कोला कोका
मजा नहीं आयेगा तो
लग जाएगा मकोका
हमको जो अब मिला है उसको ही झेलें
आओ साधू साधू खेलें
सूट बूट की लुट मची है
बोम्ब फूटे तो फूटे
बेगुनाह को हम पकडेंगे
गुनह्गर चाहे छूटें
सभी कबड्डी खेलेंगे तो मचेंगी रेलाम्पेलें
आओ साधू साधू खेलें ...
22 नवंबर 2008
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nai tajagi se likha hai. bahut achha laga. lage rahiye guru......
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