23 नवंबर 2008
बुद्धू बोक्से का बिग बॉस
जैसे ही समाचारों में यह ख़बर फैली के बिग बॉस को एक करोंड का इनाम मिला है। देश के सभी जेलों के कैदियों ने सामूहिक मांगपत्र जेलाधिकारी के सामने रखा। जिसमे स्पस्ट तौर पर लिखा है की हमें भी बिग बॉस जैसे कार्यक्रमों में शामिल होने की इजाजत दी जाए। कैदियों की मांग है की मात्र नब्बे दिन बिग बॉस के सुविधा सम्पन्न घर में रहने के लिए करोंड रुपये मिल सकते है तो इस पैसे पर सबसे पहला हक कैदियों का ही है। क्योंकि हम तो जेलों के सडांध कमरों में बरसों बरस यूँ ही बिता देते हैं। यह हमारे साथ घोर अन्याय हुआ है। हमारी रोजी रोटी पर डंका डाला है कोलौर्स चैनल वालों ने। अरे हम में से किसी भाई को ये पैसा मिल जाता तो क्या आफत आ जाती। जेल प्रशासन ने कैदियों की मांगों का चिठा फाड़ डाला और हिदायत दी की आगे से ऐसी किसी भी मांग को न उठाया जाए वरना अच्छी ख़बर ली जायेगी। बेचारे सरे कैदी मायूस हो गए उनकी समझ में यह नहीं आ रहा था की वे अब क्या करें। तभी मुह में खैनी दबाये यादव जी हवालदार उधर से गुजरे। यादवजी पिछले कई सालों से जेल की सेवा में लगे है। अचानक कैदियों को गुमसुम देखकर उनसे रहा नहीं गया और यादव जी बोल उठे - क्या बात है रे लाल्लुआ, सोहना, मोहना, मंगलुआ कहे इतना मुंह लटकाए बैठे हो। कौनो के लुगाई भाग गई का रे निरहुआ ? तभी त्रिलोचन जो की बहुत पुराना कैदी है, बोला- उ का बताएं हवलदार बाबू ऐ ससुरन के दिमाग में भूंसा भर गवा है। पता नहीं का ई सब टीवी टीवी चिल्लाय रहे थे, बड़े साहेब आ के घुड़की दे गए हैं। इसी लिए सब मुर्झुराए बैठे हैं। यादव जी ने कहा हूह- का उ बिग बॉस वाली बात तो नहीं है। अरे हाँ एकदम सही बोललें हूँ यादव जी येही बात है। यादव जी फिर बोले - तू लोग एकदम गोबर गणेश बाट हमारे दरोगा जी ने तुम्हार मांग को फाडा नहीं है उ तो चैनल वालों को बाकायदा धमके रहे थे की लाख दू लाख पहुंचे दो नहीं तो हम कैदियों की मांग मन लेंगे। तभी नथ्थू राम कैदी बोला- इसे कहते है असली बिग बॉस। जो बुद्धू बोक्से से नहीं निकला है।
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