01 दिसंबर 2008

मुंबई मौत से जीती जिंदगी

कायरों ऐसे थे तुम
मौत के नशे में, इतने गुम
कायरों ऐसे थे तुम...........
तुमने क्या सोचा था
मारेंगे सैकड़ों , हज़ार
तुम्हारी तरह इन्सान थे सारे
न किया तुने तनिक विचार
बुजदिलों कैसे हो तुम
मौत के नशे में इतने गुम , कायरों........
गोला, बारूद बंदूकों से हम
नहीं है डरने वाले
जब-जब कोशिश करोगे ऐसी
मुंह की खाओगे साले
पहुंचा देंगे हम तुम्ही वहीँ पर
आए थे जहाँ से तुम॥
कायरों ऐसे थे तुम
मौत के नशे में इतने गम। कायरों ऐसे............

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